मनरेगा से निर्मित सिंचाई कूप बना किसानों की खुशहाली का आधार

मनरेगा से निर्मित सिंचाई कूप बना किसानों की खुशहाली का आधार

द न्यूज़ इंडिया समाचार सेवा

सामुदायिक सिंचाई सुविधा से बढ़ी फसल उत्पादन क्षमता

किसान देवकी प्रसाद यादव 15 हजार रुपए महीना आय अर्जित कर बने आत्मनिर्भर

बलरामपुर : जिले में मनरेगा के तहत किए जा रहे जल संरक्षण और सिंचाई से जुड़े कार्य अब किसानों के जीवन में वास्तविक बदलाव ला रहे हैं। ग्राम पंचायत चेरा के खैरदामर पारा में निर्मित सामुदायिक सिंचाई कूप इसका उत्कृष्ट उदाहरण बनकर सामने आया है, जहां इस सुविधा से किसान न केवल अपनी खेती को सुदृढ़ कर रहे हैं, बल्कि आर्थिक रूप से भी सशक्त हो रहे हैं।

पूर्व में जहां किसान वर्षा पर निर्भर होकर सीमित फसलें ही उगा पाते थे, वहीं अब सिंचाई की समुचित व्यवस्था उपलब्ध होने से खरीफ के साथ-साथ रबी फसलों की खेती भी आसानी से की जा रही है। धान, सावां, मक्का, अरहर जैसी खरीफ फसलों के साथ गेहूं, चना, सरसों जैसी रबी फसलों का उत्पादन बढ़ा है। साथ ही सब्जी फसलों का उत्पादन कर किसान अतिरिक्त आय भी अर्जित कर रहे हैं। गांव के किसानों का कहना है कि सामुदायिक सिंचाई कूप बनने से जल संरक्षण के महत्व की समझ बढ़ी है और पानी के बेहतर उपयोग से खेती का रकबा और उत्पादन दोनों में वृद्धि हुई है। अब वे पूरे वर्ष खेती कर पा रहे हैं, जिससे उनकी आय में स्थायी सुधार हुआ है।

इसी गांव के प्रगतिशील किसान श्री देवकी प्रसाद यादव ने इस योजना का लाभ उठाते हुए सब्जी उत्पादन की दिशा में कदम बढ़ाया। उन्होंने बरबटी और भिंडी की खेती कर केवल एक माह में लगभग 15 हजार रुपये की आय अर्जित की। आमदनी उनके लिए गर्मी के मौसम में सहुलियत दी है। इससे उन्होंने अपने परिवार के भरण-पोषण एवं इलाज जैसे आवश्यक खर्चों को आसानी से पूरा किया।

उल्लेखनीय है कि जिला पंचायत सीईओ श्रीमती नयनतारा सिंह तोमर के नेतृत्व में मनरेगा के तहत जल संरक्षण एवं सिंचाई से जुड़े कार्य न केवल रोजगार सृजन कर रहे हैं, बल्कि किसानों की आय बढ़ाने, फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं और वित्तीय वर्ष 2025-26 में मनरेगा के अंतर्गत इस सामुदायिक सिंचाई कूप का निर्माण 4.43 लाख रुपये की लागत से किया गया। इस कार्य के माध्यम से 748 मानव दिवस का रोजगार सृजित हुआ, जिससे ग्राम पंचायत के पंजीकृत श्रमिकों को भी आजीविका का अवसर मिला।