मोर गांव मोर पानी महाभियान अंतर्गत निर्मित संरचनाएं सार्थक कर रहीं जनांदोलन
कोरिया : प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय द्वारा जारी किए गए मोर गांव मोर पानी महाभियान के अंतर्गत कोरिया जिले में बनाई गई जलसंरचनाएं अब अपनी सार्थकता साबित कर रही हैं।
द न्यूज़ इंडिया समाचार सेवा
मानसूनी बारिश से भरते तालाब और डबरी से जल संवर्धन कार्यों की सार्थकता
परकोलेशन टैंक, कंटूर और पांच परसेंट मॉडल से वर्षा जल सीधे हो रहा भूमिगत
कोरिया : प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय द्वारा जारी किए गए मोर गांव मोर पानी महाभियान के अंतर्गत कोरिया जिले में बनाई गई जलसंरचनाएं अब अपनी सार्थकता साबित कर रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में पहली मानसूनी बारिश से ही सभी तालाबों और आजीविका डबरियों में जलभराव होने लगा है। जैसे जैसे बारिश तेज हो रही है जल संचय और भूमिगत जल संवर्धन के लिए बनाई गई संरचनाओं से लाखों लीटर वर्षा जल भूमिगत होना आरंभ हो गया है।

प्रकृति के संरक्षण के लिए किए गए इन कार्यों का भौतिक लाभ अब दिखाई देने लगा है। खासकर तकनीकी का उपयोग करते हुए सही स्थलों पर बनाए गए परकोलेशन टेंक, पांच परसेंट माडल और कंटूर टैंच जैसी संरचनाओं से भूमिगत जलस्तर में तेजी से वृद्धि होने का अनुमान है। बीते दो वर्षों में कोरिया जिले के दोनों जनपदों मे बड़े स्तर पर जलसंवर्धन संरचनाएं बनाई गई हैं और इसका सीधा लाभ परिलक्षित हो रहा है।

जलसंवर्धन की संरचनाओ से बदलाव
कोरिया जिले में मोर गांव मोर पानी महाभियान के अंतर्गत स्थानीय स्तर पर आवा पानी झोंकी अभियान चलाया गया। जिससे जुड़कर ग्रामीण जनप्रतिनिधियों ने पूरे जिले में जलसंरक्षण के लिए निरंतर प्रयास आरंभ किए। इस दौरान पंचायत एवं ग्रामीण विकास की रोजगारमूलक योजनाओं से जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में 400 से ज्यादा डबरियों का निर्माण कराया गया। इससे बारिश के जल को सिंचाई और आजीविका गतिविधियों के लिए रोकने में बड़ी सफलता मिली है। कोरिया जिले में बीते दो वर्षों में 13 तालाब और नवा तरिया बनाकर बड़ी मात्रा में जलसंचयन का प्रयास किया गया है। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में 93 पुराने तालाबों का भी जीर्णोद्धार कार्य पूर्ण किया गया है। यह वर्षा जलसंचय के लिए कारगर पहल साबित हो रहा है।

भूजल संवर्धन में कारगर कदम
कोरिया जिले में बीते दो वर्षों में धरती पर वर्षा जल को रोककर आजीविका और सिंचाई के संसाधन बढ़ाने का प्रयास किया गया है साथ ही बड़ी संख्या में मोर गांव मोर पानी महाभियान से जोडकर किसानों के खेतों में पांच प्रतिशत माडल की संरचनाए बनाई गई हैं। इससे खेतों का अतिरिक्त पानी सीधे भूमिगत हो रहा है। जिला पंचायत सीईओ डॉ आशुतोष चतुर्वेदी ने बताया कि कोरिया जिले में विगत दो वर्षों में 344 परकोलेशन टैंक, 40 से ज्यादा गेबियन संरचनाएं और हजारों की संख्या में कंटूर ट्रेंच बनाए गए है यह सीधे वर्षा जल को भूमिगत करने का कार्य कर रहे हैं। यह चक्र लगातार पूरी बारिश में चलता रहेगा और आने वाले समय मे इसके बेहद सकारात्मक परिणाम मिलेंगे।
जल सबसे महत्वपूर्ण
कलेक्टर कोरिया श्रीमती रोक्तिमा यादव ने कहा कि प्रगति के मानक तय करने के लिए जल सबसे महत्वपूर्ण संसाधन है इसलिए बारिश के हर बूंद को संचित करना आवश्यक है। जिले के अधिकांश क्षेत्रों में गर्मियों में भूजल स्तर खतरे के निशान तक नीचे जा रहा है इसे रोकने के लिए हमें हर संभव प्रयास करना होगा। योजनाओं से होने वाले कार्यों के अलावा सभी आम नागरिक अपने घरों की छत पर गिरने वाले जल को भूमिगत करने के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम अपनाएं ताकि बारिश का स्वच्छ जल सीधे भूमिगत हो सके।
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