मेट्रीमोनियल ऐप पर परिचय के बाद शादी का झांसा, दुष्कर्म और 15 लाख की मांग का आरोप

जबलपुर : मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश देवनारायण मिश्रा की अवकाशकालीन पीठ ने मैट्रीमोनियल ऐप के जरिए युवती को प्रेमजाल में फंसाने के बाद शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने और बाद में 15 लाख रुपये की मांग

मेट्रीमोनियल ऐप पर परिचय के बाद शादी का झांसा, दुष्कर्म और 15 लाख की मांग का आरोप

- आरोपी को अग्रिम जमानत से हाईकोर्ट का इंकार

जबलपुर : मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश देवनारायण मिश्रा की अवकाशकालीन पीठ ने मैट्रीमोनियल ऐप के जरिए युवती को प्रेमजाल में फंसाने के बाद शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने और बाद में 15 लाख रुपये की मांग करने के मामले में आरोपी को राहत देने से इनकार कर दिया है। न्यायालय ने उक्त मामले में आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए उसके खिलाफ लगे आरोपों और आपराधिक रिकॉर्ड को गंभीर माना।

प्रकरण के मुताबिक भोपाल की एक युवती की पहचान नई दिल्ली निवासी देवेन्द्र सिंह से एक मैट्रीमोनियल ऐप के माध्यम से हुई थी। आरोपित है कि आरोपी ने युवती को शादी का भरोसा दिलाया और उसे दिल्ली बुलाकर शादी का वादा किया और फिर युवती के साथ शारीरिक संबंध बनाए। पीड़िता का यह भी आरोप है कि बाद में दोनों की सगाई भी हुई, लेकिन आरोपी ने शादी करने से इनकार कर दिया।

इतना ही नहीं, उसने शादी के लिए 15 लाख रुपये की मांग भी की। उक्त मामले में आरोपी की ओर से दायर अग्रिम जमानत याचिका में कहा गया कि उसने किसी प्रकार की दहेज मांग नहीं की थी। बचाव पक्ष के अनुसार पीड़िता डेस्टिनेशन वेडिंग करना चाहती थी और उसका खर्च उठाना आरोपी के लिए संभव नहीं था इसलिए उसने अपने हिस्से के 15 लाख रुपये देने की बात कही थी।

आरोपी ने यह भी कहा कि वह अभी भी पीड़िता से विवाह करने और उससे लिए गए 3.88 लाख रुपये वापस करने के लिए तैयार है। मामले में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता बी.के. उपाध्याय और पीड़िता की ओर से अधिवक्ता आदित्य खरे ने न्यायालय को बताया कि आरोपी देवेन्द्र सिंह का आपराधिक इतिहास भी रहा है। उसके खिलाफ हरियाणा के हिसार में धोखाधड़ी और पैसों की हेराफेरी का मामला पहले से दर्ज है। इसके अलावा एक अन्य व्यक्ति ने भी उसके खिलाफ धोखाधड़ी की शिकायत की है।

उभय पक्षों को सुनने के बाद अवकाशकालीन पीठ ने कहा कि सगाई होने के बावजूद आरोपी ने शादी नहीं की। साथ ही उसके खिलाफ पहले से दर्ज आपराधिक मामलों को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। लिहाजा मामले की परिस्थितियां और आरोपी का आपराधिक रिकॉर्ड उसे अग्रिम जमानत नहीं दिया जा सकता । इस मत के साथ न्यायालय ने उसकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी।(एजेंसी)