पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन और उपभोग से बचना चाहिए-आईएफएस मिश्रा

कलिंगा में जलवायु परिवर्तन और सतत् विकास पर सम्मेलन रायपुर, 16 मार्च। कलिंगा विश्वविद्यालय के प्राणीशास्त्र विभाग ने विश्वविद्यालय परिसर में जलवायु परिवर्तन, सतत विकास और स्मार्ट कृषि पर द्वितीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन (आईसीएसएसए-2026) का सफलतापूर्वक आयोजन किया। भारत तथा विदेशों से आए वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों ने भाग लिया तथा उभरती हुई पर्यावरणीय चुनौतियों और उनके सतत समाधान पर विचार-विमर्श किया। सम्मेलन का उद्घाटन मुख्य अतिथि सुनील मिश्रा, भारतीय वन सेवा, नोडल अधिकारी, छत्तीसगढ़ राज्य जलवायु परिवर्तन केंद्र द्वारा किया गया। उन्होंने बताया कि जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए व्यक्तिगत जीवनशैली और उपभोग के तरीकों में बदलाव आवश्यक है। उन्होंने समाज से अधिक जिम्मेदार और सतत आदतों को अपनाने का आह्वान किया। पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन और उपभोग से बचना चाहिए। श्री मिश्रा ने वैश्विक संघर्षों और युद्धों का प्राकृतिक संसाधनों पर पडऩे वाले प्रभावों के बारे में भी बताया। उन्होंने विशेष रूप से आर्द्रभूमि और अन्य संवेदनशील पारिस्थितिक तंत्रों का उल्लेख किया, जो ऐसे संकटों के दौरान अक्सर क्षरण और नुकसान का सामना करते हैं। आगे जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा लागू की गई विभिन्न पहलों और योजनाओं का भी उल्लेख किया। इनमें वन संरक्षण, जलवायु-अनुकूल विकास तथा प्राकृतिक संसाधनों के सतत प्रबंधन से संबंधित कार्यक्रम शामिल हैं। विश्वद्यिालय ने बताया कि विशिष्ट अतिथि के रूप में समंती सरकार, वैज्ञानिक एफ एवं प्रमुख, मौसम विज्ञान केंद्र, रायपुर भी उपस्थित रहीं। उन्होंने पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के कार्यक्षेत्र के बारे में बताया तथा कृषि को समर्थन प्रदान करने में भारत मौसम विज्ञान विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। मौसम पूर्वानुमान, जलवायु सेवाओं और प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों के माध्यम से किसानों को सही समय पर जानकारी मिलती है, जिससे वे बेहतर और सूचित निर्णय ले सकते हैं।

पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन और उपभोग से बचना चाहिए-आईएफएस मिश्रा
कलिंगा में जलवायु परिवर्तन और सतत् विकास पर सम्मेलन रायपुर, 16 मार्च। कलिंगा विश्वविद्यालय के प्राणीशास्त्र विभाग ने विश्वविद्यालय परिसर में जलवायु परिवर्तन, सतत विकास और स्मार्ट कृषि पर द्वितीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन (आईसीएसएसए-2026) का सफलतापूर्वक आयोजन किया। भारत तथा विदेशों से आए वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों ने भाग लिया तथा उभरती हुई पर्यावरणीय चुनौतियों और उनके सतत समाधान पर विचार-विमर्श किया। सम्मेलन का उद्घाटन मुख्य अतिथि सुनील मिश्रा, भारतीय वन सेवा, नोडल अधिकारी, छत्तीसगढ़ राज्य जलवायु परिवर्तन केंद्र द्वारा किया गया। उन्होंने बताया कि जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए व्यक्तिगत जीवनशैली और उपभोग के तरीकों में बदलाव आवश्यक है। उन्होंने समाज से अधिक जिम्मेदार और सतत आदतों को अपनाने का आह्वान किया। पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन और उपभोग से बचना चाहिए। श्री मिश्रा ने वैश्विक संघर्षों और युद्धों का प्राकृतिक संसाधनों पर पडऩे वाले प्रभावों के बारे में भी बताया। उन्होंने विशेष रूप से आर्द्रभूमि और अन्य संवेदनशील पारिस्थितिक तंत्रों का उल्लेख किया, जो ऐसे संकटों के दौरान अक्सर क्षरण और नुकसान का सामना करते हैं। आगे जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा लागू की गई विभिन्न पहलों और योजनाओं का भी उल्लेख किया। इनमें वन संरक्षण, जलवायु-अनुकूल विकास तथा प्राकृतिक संसाधनों के सतत प्रबंधन से संबंधित कार्यक्रम शामिल हैं। विश्वद्यिालय ने बताया कि विशिष्ट अतिथि के रूप में समंती सरकार, वैज्ञानिक एफ एवं प्रमुख, मौसम विज्ञान केंद्र, रायपुर भी उपस्थित रहीं। उन्होंने पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के कार्यक्षेत्र के बारे में बताया तथा कृषि को समर्थन प्रदान करने में भारत मौसम विज्ञान विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया। मौसम पूर्वानुमान, जलवायु सेवाओं और प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों के माध्यम से किसानों को सही समय पर जानकारी मिलती है, जिससे वे बेहतर और सूचित निर्णय ले सकते हैं।