पीओके में पाक सेना की अंधाधुंध फायरिंग, 17 प्रदर्शनकारियों की मौत से मचा हड़कंप

इस्लामाबाद : पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) के रावलकोट में सुरक्षाबलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई हिंसक झड़पों के बाद स्थिति अत्यंत संवेदनशील और तनावपूर्ण हो गई है।

पीओके में पाक सेना की अंधाधुंध फायरिंग, 17 प्रदर्शनकारियों की मौत से मचा हड़कंप

- कश्मीरियों की लाशों से पट गया रावलकोट

इस्लामाबाद : पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) के रावलकोट में सुरक्षाबलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई हिंसक झड़पों के बाद स्थिति अत्यंत संवेदनशील और तनावपूर्ण हो गई है। स्थानीय नागरिकों द्वारा किए जा रहे शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन को दबाने के लिए पाकिस्तानी सुरक्षाबलों ने निहत्थे लोगों पर सीधे गोलियां चला दीं, जिससे पूरे इलाके में भगदड़ और अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

प्रदर्शन का नेतृत्व कर रही जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) का दावा है कि केवल रावलकोट शहर में ही कम से कम नौ लोगों की जान चली गई है, जबकि कुछ स्थानीय स्रोतों के अनुसार यह संख्या 17 तक पहुंच चुकी है। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में आक्रोश की लहर दौड़ गई है और हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर उतरकर पाकिस्तानी प्रशासन और सेना के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं। भड़की हिंसा को देखते हुए पूरे क्षेत्र में भारी अतिरिक्त बल तैनात कर दिया गया है और इंटरनेट सेवाओं को पूरी तरह बंद कर दिया गया है।

अवामी एक्शन कमेटी ने मारे गए लोगों की एक सूची सार्वजनिक की है, जिससे इलाके में तनाव और अधिक गहरा गया है। पीओके में पिछले दो महीनों से जारी इस जनआंदोलन को कुचलने के लिए पाकिस्तानी हुकूमत और सेना लगातार हिंसक हथकंडे अपना रही है। आंकड़ों के मुताबिक, इन दो महीनों के दौरान जारी विरोध प्रदर्शनों में अब तक लगभग 91 स्थानीय नागरिकों की जान जा चुकी है।

यह उग्र प्रदर्शन जून महीने की शुरुआत से ही जारी हैं, जिनकी शुरुआत स्थानीय चुनावों के ठीक पहले हुई थी। पीओके के लोग अपने बुनियादी अधिकारों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगों में विधानसभा में 12 आरक्षित सीटों को समाप्त करना, स्थानीय निवासियों को अधिक राजनीतिक प्रतिनिधित्व प्रदान करना, गिरफ्तार किए गए नेताओं और कार्यकर्ताओं को तुरंत रिहा करना तथा बिजली, पानी और बेहतर शासन व्यवस्था जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना शामिल है।

पाकिस्तानी अधिकारियों की इस कड़ी और हिंसक कार्रवाई ने PoK में वर्षों से पनप रहे जन-असंतोष को और अधिक हवा दे दी है। आधिकारिक स्तर पर मौतों और घायलों की संख्या को लेकर भले ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट न की जा रही हो, लेकिन सड़कों पर उतरी भारी भीड़ यह दर्शा रही है कि जनता अब अपने अधिकारों से पीछे हटने को तैयार नहीं है।(एजेंसी)