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 कबीर धाम हिंसा - हार की खीज बना संप्रदायिक नफरत फैलाने का कारण ? अकबर भाई की छवि धूमिल करने का प्रयास

एम. एच. जकारिया 

छत्तीसगढ़ राज्य एक सांप्रदायिक सौहार्द्र के निवासियों का राज्य है यहाँ के लोग जात-पात धर्म से अलग होकर निजी सम्बन्धो को अधिक महत्त्व देते है तभी तो मोहम्मद अकबर भाई जैसा व्यक्ति (कबीरधाम) कवर्धा जिले से कांग्रेस का नेतृत्व पिछले  20 -25 वर्षो से कर रहे है!  कैबिनेट मंत्री मोहम्मद अकबर अपने साम्प्रदायिक सौहार्दपूर्ण और भाईचारे के लिए जाने जाते हैं. प्रदेश की जनता को मालूम हो कि सन 1992 में मोहम्मद अकबर ने राजधानी रायपुर के मंडी में भव्य विशाल राम मंदिर बनवा कर धार्मिक सदभावना की मिशाल कायम किया था. आज भी मंडी के राम मंदिर में मोहम्मद अकबर के नाम की ज्योति दोनो नवरात्रि में जलती है. मन्दिर की सारी व्यवस्था, पुजारी आदि की व्यवस्था तीन दशक से मोहम्मद अकबर ही सम्हालते हैं।

मोहम्मद अकबर भाई पिछले विधानसभा चुनाव 2018 में कांग्रेस के सभी विधानसभाओं की तुलना में सर्वाधिक रिकार्ड मतों से जीतेने वाले प्रत्याशी बने  क्योकि ये उनकी सरलता, सहजता, सादगी और मधुर व्यव्हार और कबीरधाम जिले की जनता की सेवा का नतीजा रहा वे जनता से निरन्तर संवाद बनाये रहते है जो उनके राजनैतिक प्रतिद्वन्दियो को खटक ने कारण बना हुआ था. कवर्धा के राजनैतिक रसूखदार
 किसी ना किसी तरह अकबर भाई की लोकप्रियता और छवि को ख़राब करना चाहते रहे है आखिर उन्हें कबीरधाम की घटना से ये मौका मिल ही गया !

 

कवर्धा में घटित घटना से ये स्पष्ट हो गया है की इसे जानबूझकर सांप्रदायिक भगवा रंग दिया गया क्योकि क़द्दावर मंत्री अकबर भाई की रिकार्ड जीत से खिसियाये कथित विपक्षी दल के लोग ताक में थे और मौका मिलते ही इसे भुनाने में लग गए क्योकि क्षेत्रीय विधायक और मंत्री अकबर भाई का कार्य और उनकी लोकप्रियता से ये इतने बौखलाए हुए थे की उनके हाथ से कबीरधाम जिले की राजनीती  फिसलती जा रही थी ? तभी अपने स्वभाव के अनुसार नफरत फ़ैलाने वाले सक्रीय हुए और  छत्तीसगढ़ में एक अलग तरह की नफ़रत का माहौल  बनाने का असफल प्रयास और सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश में लग गए ।  एक परिवार विशेष  और दल के द्वारा अपने ख़त्म होते  राजनैतिक वर्चस्व को  बचाने की खातिर कबीर धाम (कवर्धा) जिले के भाई चारे को सम्प्रदायिकता की भेट चढ़ा दिया ?


कबीरधाम नगर में एक वर्ग विशेष के द्वारा झण्डा लगाया जा रहा था जो हर वर्ष से मनाये जाने वाले त्यौहार में लगाया जाता रहा है कभी कोई  दिक्कत नहीं थी लेकिन कवर्धा मे अपने खोए हुए राजनैतिक रसुख को फिर से हांसिल करने के लिए  एक परिवार के लोगो के द्वारा  इस घटना को सांप्रदायिक रंग देने में पुर जोर तरीके से मुद्दा बनाया गया .क्योकि पिछले विधान सभा चुनाव में उनके प्रत्याशी और  संगठन की करारी  हार का अपमान वो कई दिनों से बर्दाश्त नही कर पा रहे थे? पूरी जानकारी इस तरह से है  जिसे सांप्रदायिक रंग दिया गया कवर्धा शहर के कर्मा चौक पर एक संप्रदाय द्वारा दूसरे संप्रदाय के झंडे के बगल में अपना झंडा लगाने को लेकर पैदा हुआ विवाद राजनैतिक तूल  पकड़ लिया था जबकि क्षेत्रीय विधायक श्री अकबर का इस घटना से दूर दूर तक कोई सम्बन्ध और वास्ता नहीं था,  लोहारा नाका चौक इलाके में झंडा लगाने को लेकर विवाद हुआ जिसमें दो गुटों के युवक आपस में भिड़ गये और कुछ लोग मामूली रूप से जख्मी हुए। इसी घटना को लेकर एक दल विशेष और उससे जुड़े परिवार ने  ने इस घटना को जान बूझकर सांप्रदायिक रंग देकर तूल दिया गया !

 

 
ग्राउंड रिपोर्ट और साक्ष बता रहे है इस घटना के दो दिन बाद विश्व हिन्दू परिषद ने बंद का आव्हान कर जुलूस निकाला और उसके बाद शरारती तत्वों ने तोडफ़ोड़ की और जिला प्रशासन को कर्फ्यू लगाना पड़ा। जुलूस के दौरान हुई हिंसक घटनाएं जिसे पूरा संरक्षण  इन परिवार विशेष का था और इनके द्वारा कवर्धा के बहार से भी दंगाई बुलाये गए जबकि; जिला प्रशासन ने धारा 144 और कर्फ्यू लगाया हुआ था फिर इतने सारे लोगो को लेकर  वाहन ने कैसे नगर में प्रवेश किया ये गंभीरता से सोचने वाली बात है प्रत्यक्ष दर्शीयो  और व्यापारियों का कहना है की ये हिंसक भीड़ के लोग कवर्धा के नहीं थे ये लूट पाट करने वाले गुंडे और असामाजिक तत्व थे जिन्हे प्रयोजित तरीके से कवर्धा बुलाया गया था और कबीर धाम का पुलिस प्रशासन  ख़ामोशी से मूक दर्शक बना हुआ था  !


छत्तीसगढ़ के कवर्धा शहर में झंडे को लेकर हुई हिंसा पर पुलिस और जिला प्रशासन के द्वारा   उपद्रव को लेकर शुरू हुई प्रशासनिक कार्रवाई में कई भाजपा नेताओं के नाम भी आ रहे हैं जिससे साफ़ पता चल रहा हैकि भाजपा के द्वारा फैलाया गाय नफरत था। पुलिस ने भाजपा सांसद संतोष पांडेय, पूर्व CM डॉ. रमन सिंह के बेटे अभिषेक सिंह सहित 14 भाजपा नेताओं पर अशांति फैलाने के आरोप में FIR दर्ज की है। इनके ऊपर बलवा करने साथ ही सरकारी संपत्ति को क्षति पहुंचाने की धारा लगाई गई है। जिससे साफ जाहिर होता है की ये राजनैतिक वैमनस्य था नाकि सांप्रदायिक
 

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