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 विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस 10 अक्टूबर पर विशेष, लाइफ स्किल और बाल मनोविज्ञान विषय पर होगा प्रशिक्षण
डीपी विप्रा शिक्षा महाविद्यालय के छात्रों को दिया जायेगा दो दिवसीय प्रशिक्षण

9 और 10 अक्टूबर को होगा प्रशिक्षण
        
बिलासपुर : राज्य मानसिक स्वास्थ्य चिकित्सालय, सेंद्री  द्वारा डीपी विप्रा शिक्षा महाविद्यालय   के छात्रों के लिए विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के उपलक्ष मेंदो दिवसीय लाइफ स्किल और बाल मनोविज्ञान विषय प्रशिक्षण का आयोजन 9 से 10 अक्टूबर को किया गया है ।

प्रशिक्षण सिस्को वेबेक्स के माध्यम से आयोजित होगा । प्रशिक्षण का उद्देश्य शिक्षा विषय में स्नातक शिक्षा और डिप्लोमा शिक्षा (बीएड और डीएड) कर रहे छात्रों को अपने विद्यार्थी के मनोविज्ञान को समझना और उसके अनुरूप कार्य करना है ।

प्रशिक्षण का आयोजन राज्य मानसिक चिकित्सालय,सेंद्री,बिलासपुर के अस्पताल अधीक्षक डॉ. बीआर नंदा और डीपी विप्र शिक्षा महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ.विभा मिश्रा के संयुक्त मार्गदर्शन में किया जाऐगा ।

इस वर्ष की थीम है ‘’Mental health for all. Greater investment. Greater access’’``मानसिक स्वास्थ्य सभी के लिए, अधिक निवेश, ज्यादा पहुँच’’अर्थात मानसिक स्वास्थ्य सेवाएँ सभी के लिए हर जगह उपलब्ध होनी चाहियें।

प्रशिक्षण कार्यक्रम की जानकारी देते हुऐ मनोचिकित्सक डॉ. मल्लिकार्जुन सागि ने कहा ऑनलाइन प्रशिक्षण में 150 स्नातक शिक्षा और डिप्लोमा शिक्षा के छात्र भाग लेंगे । इस प्रशिक्षण के दौरान साइकाइट्रिक सोशल वर्कर प्रशांत रंजन पांडे भी प्रशिक्षक के रूप में मौजूद रहेंगे ।

भावी शिक्षकों को प्रशिक्षण कार्यशाला के दौरान प्रारंभिक शिक्षा एवं बाल मनोविज्ञान के माध्यम से शिक्षण कौशल,जीवन कौशल के तरीके भी सुझाये जायेगे। बच्चों को कैसे तनाव और मानसिक समस्या से बचाया जाये पर भी इस सत्र में चर्चा होगी ।

प्राचार्य डॉ.विभा मिश्रा ने बताया शिक्षण कार्य करना एक विशेष विधि है। जब तक  इसकी जानकारी नहीं होगी तब तक शिक्षा का उद्देश्य सफल नहीं हो सकता। बाल मनोविज्ञान के ज्ञान से कक्षा में सबसे पहले अपने छात्रों की मनोदशा को समझते है। इसलिये बच्चों के साथ अच्छा व्यवहार करना चाहिए, ताकि शिक्षक उनकी समस्याओं को समझ सके और शिक्षा में अवरोध उत्पन्न करने वाली चीजें  सामने आ सकें। ``जब तक हम बच्चों की समस्याओं और तनाव को दूर नहीं करेंगे तब तक उनके साथ किया जाने वाला प्रयास सफल नहीं होगा।‘’

उन्होंने बताया माडयूल के अनुसार बाल मनोविज्ञान विषय का गहनता के साथ अध्ययन जरुरी है ।शिक्षा के क्षेत्र में बदलते परिदृश्य के अनुरुप बच्चों के मनोविज्ञान को समझते हुए अध्यापन कार्य कराने से ही आप एक सफल शिक्षक बन सके इसलिए इस प्रशिक्षण का आयोजन किया जा रहा  है ।

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